गुरुवार, 13 जुलाई 2017

उत्तराखंड राज्य विकास एक सोच

आज की बात उन लोगो के नाम जो रोजगार की तलाश में अपना उत्तराखंड त्याग कर देश के अन्य हिस्सों में चले जाते है.  जब से उत्तराखंड राज्य का उदय हुआ तब लोगो के मन में एक बात थी की अब उन के राज्य का भाग्योदय होने से कोई नहीं रोक सकता।

उत्तराखण्ड राज्य को बने हुए भी अब बहुत समय हो गया इस बीच इस राज्य का दुर्भाग्य यह रहा की यहाँ राजनैतिक अस्थिरता रही राज्य में कई मुख्यमंत्री देखे. 
और योजनाओ के किरवयवांन से जायदा नेताओं को अपने पद और अपनी कुर्सी की चिंता सताती रही. 

अब जब की राज्य और केंद्र में बीजेपी की सरकार है, तो देखना है की इस बार हम विकास को कहा तक देख पाएंगे।

वैसे तो जब भी हम गांव रोजगार की बात करते है तो बस वही घीसा -पीटा जबाब मिलता है की हम पहाड़ी राज्य है यहाँ संसाधनों की कमी है और सरकारी खजाने में पैसे की कमी है, लेकिन अगर आप बात पहाड़ी राज्यों की करते है तो आप एक बार पूर्वोत्तर राज्यों का भर्मण कर आये तो पता चलेगा की अगर चाह हो तो कही भी विकास की गंगा को बहाया जा सकता है। 

में केंद्र सरकार और राज्य सरकार को अपने इस ब्लॉग के माध्यम से बताना चाहता हु अगर हम ने जल्द उत्तराखड में विकास की गंगा नहीं बहाया तो वो दिन दूर नहीं जब यहाँ के लोग भी अलगवववाद की बात करने लगेंगे और यहाँ पर भी लाल झंडा फहराया जाने लगेगा। 

अगर पहाड़ के लोग सीधे साधे मेहनती है तो इस का मतलब ये बिलकुल नहीं लगाया जाना चाहिए की आप उन का उपयोग कैसे भी कर सकते है। 

इस लिए मेरा अनुरोध है सभी लोगो से इस बोल्ग को जयादा से जायदा लोगो मैं शेयर करे ताकि आप की बात राज्य सरकार  के कानो तक पहुंचे 

जय उत्तराखंड जय भारत !!!

शनिवार, 3 दिसंबर 2016

"उम्मीद की किरण लक्ष्यम "


                        "उम्मीद की किरण लक्ष्यम "




    जब हम बात करते है डेल्ही की,  तो मन में एक ही  बात आती है और वो है,  भागदौड़ वाली जिंदगी पैसा पैसा हाय पैसा वाली जिंदगी !

और जब हम बात करते है वसंत कुञ्ज की तो सब से पहले जो बात दिमांग में आती है वो है, की वह बड़ी ही समृद्ध जगह  है  जहा पर घर होना आज भी डेल्ही में बड़े गर्व की बात माना  जाता है !

    19  नवम्बर 2016  को मुझे मौका मिला की  में अपने दोस्तों के साथ,  एक फोटोग्राफर का  सामाजिक उत्तरदायित्व वाले फोटो शूट में  जाने का, और हम पहुच गए इ ब्लॉक वसंत कुञ्ज। में धन्यवाद करना कहूंगा आप सभी ग्रुप में भाग लेंगे वाले सहभागियों का जिन्होंने इस फोटो शूट को सफल बनाया और में ये भी आशा करता हु की आगे भी हम इस प्रकार के प्रयास करते रहेंगे.

    वेसे तो डेल्ही मैं जुग्गी झोपडी होना कोई अवसाद नहीं है,  की क्योकि जब भी आप किसी भी एरिया मैं जाते है तो आप को जुग्गी झोपडी जरूर मिलेगी, और ये बात भी सुच है की अब  डेल्ही की ज्यादतर झुग्गी झोपड़िया  अब विकास की रह में  चल  पड़ी है,  पर जब हम इ ब्लॉक वसंत कुञ्ज की झुग्गी झोपड़ियो मैं पहुचे तो आज आजादी के 65 साल बाद भी यहाँ  कुछ नहीं बदला है,

इन झुग्गी झोपड़ियो में आज तक आधारभूत सुविधाओ का विकास नहीं हुआ, जैसे की यहाँ पीने के पानी के लिए आज तक कोई कनेक्शन नहीं है, बिजली भी आज तक ये लोग चोरी जलाते है, और जहा हमारा पूरा देश स्वच्छ भारत के लिए एकजुट हो कर अभियान चला रहा है वहाँ  आज तक यहाँ पर कोई स्वच्छता के लिए  नहीं आता,  कोई अभियान नहीं चलाया गया, यहाँ पर आज भी लोग खुले में  सौच  के  लिए  मजबूर है उसकी भी यहाँ पर आज तक कोई व्यवस्था नहीं की गयी है.

मैं धन्यवाद करना कहूंगा लक्ष्यम को (NGO ) जिस ने अपने प्रयासों से यहाँ के लोगो जीवन में बदलाव लाने
की पहल की है, उन्होंने यहाँ पर एक आधारभूत स्कूल की संरचना की है जहा पर यहाँ के बच्चे आकर आधारभूत शिक्षा लेते है साथ साथ उन्हें आगे पढने के प्रोसाहित किया जाता है, और उन्हें यहाँ पर कुछ हस्थकारी का काम सिखाया जाता है ताकि की वो सड़क के किनारे भीख  माँगने जाने के बजाय अपने हाथो के जरिये किये गए कामो से धन का अर्जन करे.



जब हमारा ग्रुप यहाँ पंहुचा तो यहाँ  के,   लोगो  के मन में एक उम्मीद की किरण आयी की शायद कोई सरकारी डिपार्टमेन्ट उन की सुध लेने आया है पर जब उन्हें पता चला की हम किसी और ग्रुप से है तो उन्होंने बोला की पिछले 40  साल से इसी तरह जीने के लिए मज़बूर है अगर आप हमारी समस्याए ऊपर (सरकार) तक पंहुचा दे तो अच्छा हो.

देखने में  भले ही यह पहल  छोटी सी  लगती है पर हमारा मानना है की  लोगो के जीवन को आगे ले जाने में किया गया कोई भी कार्य कम महत्वपूर्ण नहीं होता बल्कि उस के पीछे के वो उदेश्य महत्वपूर्ण होते जिन  द्वारा  हम लोगो के जीवन स्तर में बदलाव ला सकते है ताकि वो ये पिछड़ा वर्ग भी उन लोगो के समकक्ष  आ सके जो अपने आप को सभय  समाज कहलाता है.













मंगलवार, 3 मई 2016

"उत्तराखंड राज्य और भारतीय रेलवे एक सपना"

                                         
                                          
                                             उत्तराखंड राज्य और भारतीय रेलवे एक सपना

   जब भी  किसी नये राज्य का गठन होता है तो वहां  के लोगो में  उम्मीदें जागती   है की अब उस राज्य के विकास को कोई नहीं रोक सकता, क्योकि आखिर उस नये राज्य का गठन उन्ही उम्मीदों  के साथ हुआ था.

आज बात एक ऐसे ही एक   राज्य की जिसे भारत का 27  वा  राज्य होने का गौरव मिला  उत्तराखंड,  उत्तर प्रदेश  से अलग हो के बना राज्य है ! उत्तराखंड के लोगो के  आंदोलन व संघर्ष्  से एक नए राज्य का उदय हुआ जिसे के उत्तराखंड व देव भूमि के नाम से पुकारा जाता है, जब केन्द  सरकार ने यह निर्णय लिया उस समय उत्तराखंड  के लोगो में उम्मीद की किरण दिखाई दी। अब उन्हें लगने लगा  की   अब  प्रदेश का विकास और भी बढ़िया तरीके से हो सकता है और उन्होंने इस के लिए के लड़ाई लड़ी और आख़िरकार वो दिन भी आया जब लोगो के मन की बात को सरकार से समझा और 9 नवंबर  2000 को एक नए उत्तराखंड राज्य का उदय हुआ.

नया राज्य नयी उम्मीदों के साथ एक नया राज्य पर गठन के 16  साल के बाद भी आज भी कोई खास विकास इस राज्य ने नहीं देखा है, तथा 2015  के सरकारी आंकड़ों के हिसाब से करीबन 2600 गाओं का पलायन हो चूका है  उसकी एक बड़ी वजह यहाँ की राजनीतिक अस्थिरता  और और कुछ राजनेताओ की इच्छासक्ति की कमी भी है.

कांग्रेस की सरकार के समय जब 2009 का रेल बजट सदन में रख गया था उस समय उत्तराखंड को रेल मार्ग से जोड़ने की बात हुई थी और ओर  तत्कालीन रेलमंत्री सुश्री ममता बनर्जी ने सदन को यह विश्वास दिलाया था की अगर प्रदेश सरकार सहयोग करे तो भारत सरकार उत्तराखंड को रेल मार्ग से जोड़ने को तैयार है.

पर अभी तक जैसा की उत्तराखंड में कोई रेल परियोजना दूर दूर तक नहीं है इस से तो यही   प्रतीत होता है की किसी भी राज्य सरकार सरकार  ने रेल मंत्रालय के साथ  विचार विमश नहीं किया।

दूसरा अगर राज्य सरकारों को लगता है की वह इस योजना के लिए उन्हें काफी  धन खर्च करना पड़ेगा तो ये सही है पर भारत की सरकार जनकल्याणकारी सरकार है और इस में ऐसा कुछ भी नहीं की राज्य सरकार कुछ नहीं कर सकती हो.


जहां तक उत्तराखंड की सरकार का और इस प्रदेश के विकास का मुदा है अभी तक की सभी सरकारे ऐसा  करने में विफल रही है और एक ब्लोगर होने के नाते में यह कहना चाहता हु की अगर आप किसी भी ऐसे राज्य की तुलना करेंगे जहां पर रेलमार्ग है और और जहां पर नहीं है तो आप पायंगे की वो राज्य जयादा विकासरत है जहां पर की रेलमार्ग है।  उदहारण  जैसे की हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, और असम.
रेलमार्ग के बन जाने से इस पहाड़ी राज्य का पर्यटन के क्षेत्र   काफी विकास की सम्भावनाएं है

और जहां तक धन और रोजगार की बात है मेरा एक और सुझाव है क्यों न मनरेगा को रेल के विकास से जोड़ दिया जाये इस से दो फायदे होंगे एक तो पहाड़ के लोगो को रोजगार मिलेगा वही दूसरा इस प्रदेश में धन का प्रवाह शुरू हो जायेगा जिससे इस प्रदेश जो की मुखयतः पहाड़ी लोगो का प्रदेश है उन को फायदा होगा.

उत्तराखंड रेलमार्ग बन जाने से राज्य की दशा और दिशा का बदलना तय है यहाँ की ारथवय्वस्था का बढ़ाना  तय है इस लिए उत्तराखंड की तरक्की और यहाँ के लोगो की आर्थिकं वयव्था को बढ़ाने के लिए आप का  सहयोग जरूरी है।



सन 2009  उस समय का समाचार पत्र का फोटोकॉपी आप सभी के लिए. 


इस घोषणा के बाद प्रदेश के कुछ समाजसेवियों ने भी कोशिस की और कुछ पत्राचार भी किया उस मैं से एक पत्राचार की छाया प्रति सलगन :-






बुधवार, 17 जून 2015

" उत्तराखंड स्थायी निवास प्रमाण पत्र"



       कुछ दिन पहले मुझे अपने गॉव  जाने का मौका मिला, कुछ पारिवारिक समारोह था, वैसे अब पहले के मुकाबले उत्तराखंड के गॉव  का भी मौसम बदल गया है, अब लोगो ने भी अपने घरो में पंखे लगा लिए है, क्योकि रात में भी अब गर्मी बढ़ गयी है, वैसे आप सोच रहे होंगे की में आज सायद गॉव के मौसम के बारे में ये ब्लॉग लीख  रहा हू  तो मैं  आप को बता दू की ऐसा मेरा आज का विचार नहीं है, आज में बात करूँगा सरकार द्वारा  प्रदान किये जाने वाले स्थायी निवास प्रमाण पत्र की, 

     आज भी जहा गांव  में रोजगार के साधनो की भयंकर कमी है, वैसे लोगो को लगा था की शायद अलग उत्तराखंड होने के बाद परिस्थी कुछ बदलेगी, पर ये आशा अभी तक आशा ही है, अगर कही विकास हुआ भी है तो वो छेत्र है जो की पहले से ही विकसित है या फिर वो प्लेन (सपाट) छेत्र है, जो असल पहाड़ का छेत्र है उस की परस्थिती  में कोई बदलाव नहीं आया है उन छेत्रो की इस्थ्ती आज भी वैसी ही  है जैसा की अलग राज्य बनने से पहले थी . 

राज्य सरकार की बहुत सी योजनाओ का लाभ उठाने के लिए आप को अपना स्थायी निवास प्रमाण पत्र की प्रती  लगानी  पड़ती है, पर हमारा  दुर्भाग्य जो स्थायी निवास प्रमाण पत्र सरकार की तरफ से लोगो को फ्री में बनाना  चाहिए उसको  बनवाने के लिए राज्य में दुकाने खुल रही है, जहा पर स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाने की एवज में पैसा लिया जाता है, और इन दुकानो को  खुलवाने में राज्य सरकार अपना पूरा सहयोग  दे रही है, क्योकि ऐसा प्रतीक होता है की सरकार में बैठे हुए कुछ लोग जो की इन दुकानदारो से मिले हुए है उन के हिसाब से नियमो में फेर बदल 
करवा कर लोगो को परेशान करने का काम कर रहे है, इसका एक उदहारण आजकल आप जब भी अपना स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाने जाये तो अपना भाग 2 रजिस्टर की कॉपी उस में प्रधान की मोहर ले कर तहसील जाना पड़ता है उस के बाद वहा के सरकारी बाबू अपना पैसा बनाने के लिए आप के फ्रॉम में 10 गलतिया बताएँगे, और जैसे ही आप उनको  कुछ चढ़ावा देंगे वो आपके फॉर्म की  सभी गलतियों को नज़र अंदाज़ कर आप का स्थायी निवास प्रमाण पत्र बना कर दे.

दूसरा उदहारण अब स्थायी निवास प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनने लगे है पर इस को बनाने के लिए भी आप को तहसील ही जाना पड़ता है, जब आप को तहसील ही जाना है तो किस बात का ऑनलाइन।।। उसके बाद वहा पर आधे टाइम लाइट नहीं होती कभी वहा पर सरकारी बाबू छूटी पर होते है कभी वहा पर इंटरनेट नहीं काम करता, अगर इन सब बातो से कोई परेशान होता है तो वो है, मजबूर आम और गरीब आदमी, जो बड़ी मुश्किल से अपने गॉव  से वहा तक पहुचता है फिर भी उस का स्थायी निवास प्रमाण पत्र नहीं बनता, अब मेरा सवाल ये है की सरकार क्या कर रही है क्या उस को नहीं मालूम की गॉव  में  लाइट और इंटरनेट की क्या हालत है, 

वो आम आदमी जो की स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाने आया था 50 किलोमीटर  दूर से अपना पैसा अपना टाइम निकाल  कर जिसने अपने कई कामो को छोड़ कर अपना स्थायी निवास प्रमाण पत्र की बनवाने के लिए इतनी दूर से आया है, क्या कोई है जो उसकी सुध ले रहा है… 

दोस्तों मुझे बड़ा दुख होता जब में देखता हू  की कोई वय्क्ति  अपने काम को करने के लिए सरकारी ऑफिस के चक्कर लगाता लगाता थक जाता है पर किसी को उस की कोई सुद्ध नहीं।।।

वैसे ही उत्तराखंड की लोगो को  गरीबी ने  मारा  है, और ये सरकारी क़ानून भी उन को मारने का काम कर रहे है.

हमें चाहिए की सरकारी योजनाओ का सही तरीके से किर्यान्व्यन हो , जो की वहा के निवासियों के लिए सुविधाजनक हो जब  सरकारी योजनाये बने उस में इस बात का ध्यान जरूर रखा जाये की कौन सी योजना पहाड़ी छेत्रो के लिए है और कौन से प्लेन छेत्रो के लिए.… 

अगर आप मेरे इस ब्लॉग के साथ है तो कृपया इस को अपने दोस्तों तो शेयर करे ताकि ये ब्लॉग उन लोगो तक पहुंचे जो इस समस्या की जड़ मैं है। … 


जय उत्तराखंड!!!




















सोमवार, 20 अप्रैल 2015

" Billing is Heaven for peraguliding " पैराग्लाइडिंग का सवर्ग बिलिंग "


    जब आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से परेशान हो गए हो, और आप  का मन  कुछ नया करने को करे तो आप के लिए एक बहुत ही बढ़िया और साहसिक कार्य है "पैराग्लाइडिंग!  हो सकता है आप में से कुछ लोग ऐसे भी हो जो इस का नाम पहली बार   सुन रहे हो और कछू लोग ऐसे भी है जिन्होंने इस के बारे मैं सुना तो हो पर कभी इतना ध्यान न दिया हो !

    तो आज बात  हमारे  पैराग्लाइडिंग वाले साहसिक कार्य की, वैसे तो मैं बड़ा ही घुमक्क्ड़ किसम का व्यक्ति हु  और इस घुमक्क्ड़पन का  साथ मेरी धर्म -पत्नी  अच्छे से देती है   क्योकि में आज तक जीतनी भी जगह पर घुम्मकड़ी करने गया हु उस मैं 80 % आईडिया उन का ही है, तो बस क्या था की हमें मौका मिला "देव  भूमि हिमाचल प्रदेश" जाने का, वैसे तो हम दोनों उत्तर भारत में कई जगह घूमे है पर ये पहला मौका था  जब हम हिमाचल जा रहे थे, मन में बड़ा ही उत्साह था, आखिर एक एक पहाड़ी मूल का आदमी, दूसरे पहाड़ी छेत्र  जा रहा था, तो बड़ी उम्मीदे और बड़ा उत्साह ! बस फिर क्या था दोनों पहुंच गए हिमाचल प्रदेश और हिमाचल में "पालमपुर" पालमपुर में ठहरने के दो कारण थे पहला की मेरे साथ काम करने वाले मेरे सहयोगी गुलशन का विवाह था और दूसरा की पालमपुर एक ऐसी जगह पर इस्थित  है जहा से आप "धर्मशाला, मैक्लोड गंज, बैजनाथ मंदिर और भारत में पैराग्लाइडिंग  के स्वर्ग बिलिंग बहुत्त आसानी से पहुंच सकते है,  हमने अपना विचार बनाया की हम भी जायेंगे बिलिंग और हम भी लुप्त उठाएंगे पैराग्लाइडिंग का !

   तो मन में उमंग और तरंग लिए हम भी चल पड़े बिलिंग लिए, वैसे में आप को बता दू की बिलिंग पहुचने के लिए आप के पास विकल्प है पहला तो आप वहा जाने के लिए टेक्सी किराये पर ले ले और  या फिर आप बीड तक बस में जा कर वह से टेक्सी ले ले क्योकि कोई भी बस आप तो बिलिंग तक नहीं ले कर जाएगी, हमने बीड पहुंच कर बात की वहा के लोकल लोगो से उन्होंने बताया की यहाँ पैराग्लाइडिंग पिछले 5 सालो में बड़ा ही लोकप्रिय हुआ है, इस की वजह से यहाँ के लोगो को रोज़गार मिला है और ये भारत में पैराग्लाइडिंग का स्वर्ग है.

   बीड मे ही हमारी मुलाकात हुई राकेश जो की यहाँ पर पर्यटकों को पैराग्लाइडिंग करवाते है, हम उन्ही  साथ चल पड़े बिलिंग के  लिए जो की बीड से 12 किलोमीटर दूर है, रास्ते में राकेश ने बताया की बिलिंग की पैराग्लाइडिंग विश्व में दूसरा स्थान रखती है, वैसे अब की बार बिलिंग में पैराग्लाइडिंग का विश्व कप होने जा रहा है.

जैसे ही हम बिलिंग पहुंच वहा का नज़ारा देखते ही बनाता था, बहुत ही सुन्दर और लोग क्या मस्ती कर रहे थे, कुछ ऐसे लगा जैसे लोगो को पंख लग गए हो, बहुत से लोग तो ऐसे हवा में हिंडलो ले रहे थे जैसे हवा मैं झूला झूल रहे थे,  हमने भी हवा में उड़ने का साहस किया हमारा अनुभव भी एक दम अविस्वनीय लग रहा था हम आसमान मे थे और हमारे पायलट हमें बदलो और बर्फ के पहाड़ो के पास ले जा रहे थे, बदलो के बीच हमारे साथ कभी कभी पक्षी भी आजाते थे सोच कर ही रोमांचित हो जाता था की हम भी आज पक्षी की तरह से उड़ रहे है ये सभी   अनुभव कभी न भूलने वाला है ऐसा लगा जैसे आप को सच में पंख लग गए हो… 





बुधवार, 25 मार्च 2015

"क्रिकेट वर्ल्ड-कप 2015"

                                                           क्रिकेट वर्ल्ड-कप 2015 

   पूरी दुनिया में आजकल क्रिकेट वर्ल्ड-कप 2015  का खुमार फैला हुआ है, और और जिस देश मैं क्रिकेट एक धर्म हो उस देश का और उस देश के  लोगो का क्या कहना। वैसे तो 2015  वर्ल्ड-कप  खेलने से पहले ही भारत के खिलाड़ियों का आत्मविस्वास बहुत बड़ा हुआ था, क्योकि उन्होंने उस से पहले की श्रंखला में अच्छे खेल का पर्द्शन किया था। 

मुझे  याद आता है जब हमारी टीम को वर्ल्ड-कप २०१५ के लिए चयन्ति किया गया था तब उस के चयन पर सवाल उठाये गए थेकी क्या ये खिलाडी अपने देश के लिए एक बार फिर वर्ल्ड-कप ला पाएंगे अभी तक तो खिलाड़ियों ने जिस प्रकार का खेल इस वर्ल्ड-कप में दिखाया है वो काबिले तारीफ है, सेमीफइनल तक की दौड़ मैं अभी तक उन से आगे कोई नहीं निकल पाया, जिसे हमारी कमजोरी बताया जाता था वो बोलर अपना सर्वश्रेठ पर्दशन कर रहे है, इस में कोई दो राय नहीं की पूरी टीम जिस भावना से खेल के मैंदान में उतर कर अपने विरोधियो को धूल चटा रही है वो सिर्फ और सिर्फ तभी सम्भव है जब आप की टीम एक जुट होकर अपना पर्द्शन करे और अभी तक ऐसा हो भी रहा है

अब बात होने वाले सेमीफइनल की जिस में की हमारा मैच एक मजबूत समझी जाने वाली टीम के साथ है, वैसे ऐसा नहीं हिअ नहीं है की हम ने इस टीम को कभी हराया नहीं है, कई बार हराया है पर एक बात में हमेशा कहता हु कभी भी विरोधी टीम को कम कर  आंको, समय है जब हमें एक बार फिर से अपना बेहतर पर्द्शन  दे कर अपनी टीम को इस वर्ल्ड-कप के फाइनल में पहुचना है जहा पर न्यूज़ीलैंड पहले से ही पहुंच चूका है.
 अब देखना है और मेरी पूरी उम्मीद है की हम ऑस्ट्रेलिया को हरा कर फाइनल में पहुचेंगे। 








रविवार, 15 मार्च 2015

"India's Daughter"



   आज बात निर्भया वाली डॉक्यूमेंट्री की.…  माना की ये डॉक्मेंट्री बनाना या दिखाना सही नहीं था.… ऐसा सरकार मैं बैठे हुए कुछ लोग और कुछ विद्वानो का भी यही मत है. 

   में ये मानता हु की इस मैं ऐसा कुछ भी नहीं की जिसे न दिखाया जाये और ये कोई बाजारीकरण नहीं ,  जैसा की मैं कई समाचार पत्रो में पड़ा.… मेरे हिसाब से ये एक साहसिक कार्य है जो की बीबीसी ने किया है जब तक हम लोगो को समाज मैं होने वाली घटनाओ के बार में नहीं बताएँगे तब तक कैसे लोगो को समाज के बारे मैं पता चलेगा!

    दूसरी बात हम सिर्फ क्यों मुकेश (आरोपी) की ही बात के बारे मैं पूरी डॉक्यूमेंट्री में बात कर रहे है  क्यों नहीं हम जो दूसरे लोगो जो इस डौक्यूमेंटी का हिस्सा है उन के बारे में क्यों नहीं बात कर रहे.… ये आदमी जो गलत है वो तो है पर कुछ ऐसे भी लोगो है डौक्यूमेंटी मैं जिन्होंने इस पूरी वारदात में अपना सब कुछ गवाया है कुछ लोगो ने अपनी ड्यूटी को कितने बढ़िया तरीके से निभाया है वो भी इस डौक्यूमेंटी का हिस्सा है जो  हम इस डौक्यूमेंटी में देख सकते है!

   मैंने अपने पहले के बोलोगो में भी लिखा है की किसी भी घटनाओ के दो पहलु होते है और हमें दोनों पहलु समझने होंगे सिर्फ विरोध करना है इस लिए किसी भी बात का विरोध नहीं करना है.  




सोमवार, 9 फ़रवरी 2015

आम आदमी पार्टी

aam aadmi party symbol aam aadmi party saturday said the response of ...  फिर एक बार फिर से वो दिन आ गया जब सभी डेल्ही के नेताओ का जोर जोर से धड़क  रहा है, क्योकि कल आने  जनता का फैंसला आने वाला है, इतने दिनों की जद्दो जहद के  फैसले का दिन…

 

    सब के मन में यही बात है क्या केजरीवाल फिर से  डेल्ही मुख्यमंत्री बनने जा रहे है या फिर कल कुछ और रिजल्ट आने वाले है!

 जो भी हो वो तो कल ही पता चलेगा, लेकिन डेल्ही की राजनीती मैं जिस प्रकार से आम आदमी पार्टी ने अपने वोट बैंक को बनाया है और डेल्ही की जनता की बीच अपना वर्चस्व बनाया है वो काबिले तारीफ है !



 और दुबारा से डेल्ही मैं आगे निकल कर आ रहे है देखना है की जो भरोसा आम आदमी पार्टी मैं दिखाया है वो देखो क्या अपने वादो को पूरा कर पाते है नही....

शनिवार, 3 जनवरी 2015

:: Happy New Year 2015 to all my friends ::




   नया साल मेरे सभी दोस्तों मेरे सभी पाठको को मुबारक, काफी दिनों बाद बोलग पर वापसी की है  तो  माफ़ी चाहता हु पर एक बात मेरी दुआए और मेरा प्यार हमेशा आप पर बना रहे और आप सभी का  प्यार और सनेह मुझे पहले की भाति मिलता रहे बस इसी कामना के साथ एक  बार फिर से नूतन वर्ष 2015 की हार्दिक शुभ कामनाये !!!


शनिवार, 9 अगस्त 2014

डेल्ही में ट्रैफिक जाम की समस्या और हमारे नेता



    दोस्तों आप में से मेरे कई दोस्त ऐसे होंगे जो की  दक्षिणी डेल्ही की एक खास समस्या से जूझ रहे है और हम इस समस्या को कई बार नज़र अंदाज़ भी कर देते है, आज का ये मेरा ब्लॉग है डेल्ही मैं लगने वाले उच्च राजनीयको के रूटों को ले कर.जिन को लेकर जनता को कई बार दो चार होना पड़ता है!

   मेरा ऐसा मानना है की आप जरूर कभी न कभी डेल्ही मैं इन उच्च राजनीयको के रूटों के कारण जाम मैं फसे होंगे, जाम में फसना वैसे तो ये डेल्ही वालो की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हो गया  है, पर कई बार जब ये पता चलता है की ये जाम सिर्फ उच्च राजनीयको के रूटों की वजह से लगा है तो बड़ा गुस्सा आता है.

  दोस्तों वैसे मैं कई बार इस जाम का हिस्सा बना हु पर आज जो मैंने देखा वो बड़ा ही दुखद था, डेल्ही छावनी से धौला कुंआ की तरफ करीबन ४५-६० मिनट का जाम वो भी सिर्फ इन  उच्च राजनीयको के रूटों के कारण, इस जाम की वजह से पूरा यातायात मानो एक घंटे के लिए ठहर गया था किसी को कुछ पता ही नहीं की आखिर ये जाम क्यों लगा हुआ है लोग अपनी गाड़ी बीच सड़क में खड़ी कर के इस दूसरे से पूछते हुए दिखे की  आखिर हुआ क्या है जाम क्यों है तो पता चला किसी बड़े  नेता का रूट लगा है.

उस बड़े नेता के चक्कर में अगर किसी का नुकसान हुआ है तो वो है आम जनता का जिन्होंने ट्रेन पकड़ने के लिए अलग अलग डेल्ही के स्टेशन पर जाना था,किसी को कही जाना था किसी को कही सब को कही न  जाना था मुझे  यह देख कर बड़ा दर्द हुआ की वो लोग जिन की ट्रेन  का टाइम निकलता जा रहा था वो तो बस और गाड़ी के अंदर ही रोने लग पड़े, की उन की ट्रेन निकल जाएगी और वो अपने घर या अपनी गंतव्य स्थान तक नहीं पहुंच पाएंगे  इस मैं उन लोगो की कोई गलती नहीं वो अपने सही समय से घर से अपने गंतवय स्थान के लिए निकले थे पर उन्हें नहीं पता था की आज उच्च राजनीयको के रूटों लगने वाला है। आप तो वैसे ही जानते है की भारतीय रेल मैं कन्फर्म टिकट लेना कितना मुश्किल काम है और उस के बाद अगर आप का ट्रेन सिर्फ इन राजनेताओ की रूट के वजह से छूट जाये तो किसी भी व्यक्ति की मनोदशा  को समझ सकते है .

आखिर उस वयक्ति की क्या गलती, ये तो कुछ  बी ही भी नहीं कई बार जब इस तरह की रूटों की बीच एम्बुलेंस आ  जाती है फिर भी हमारे पुलिस के अधिकारी उस एम्बुलेंस को नहीं जाने देते चाहे उस के अंदर वाला मरीज किसी भी हालत में क्यों न  हो!

क्या यही है हमारी वयवस्था की हम आम लोगो को इन नेताओ के लिए परेशान करे, आखिर कौन है जो जनता के लिए सोचेगा, कब तक मुसाफ़िर ऐसे है जाम मैं फस कर अपनी बस ट्रेन और मरीज अपनी जान गवाते रहंगे!

 शायद आप ने इन बातो पर गोर न किया हो मैंने भी नहीं किया था पर आज जब मैंने लोगो को रोते हुए देखा और उन के दर्द को महसूस किया तब मेरे को लगा की नहीं,  शायद मुझे ही इस की शुरुवात करनी पड़ेगी  मैंने अपना काम किया अब आप लोग अपना काम करे इस ब्लॉग को इतना शेयर करे ताकि आम जनता का दर्द
हमारी सरकार तक पहुंचे और वो इस रूट वयवस्था की कमियों को दुरुस्त करे





रविवार, 3 अगस्त 2014

नयी मुसीबत है ये ई - रिक्शा


    आज बात डेल्ही की और डेल्ही  में चलने वाले ई - रिक्शा की, डेल्ही की सड़को पर बेखौफ मन मौजी तरीके से डोलते हिंडोले लेते  ये मौत के फ़रिश्ते जिन के लिए न कोई कानून है न कोई कायदा ___ काफी बार सोचता हु की आखिर क्या हो गया है हमारी सरकार को किसी भी बात को लेकर सवेदनशील ही नहीं है.  इतने दिनों ये ये ई - रिक्शा का  मामला जोरो शोरो से चलाया जा रहा था ! लेकिन किसी कोई मतलब ही नहीं, डेल्ही में तो कुछ ऐसा हो गया है की एक मुसीबत जाती नहीं दूसरी आ जाती है! अब नयी मुसीबत है ये  ई - रिक्शा जिनका परिचालन सरकार को  सड़को से हटा लेना चाहिए चाहिए !

    वर्तमान  समय में कोई भी सरकार हो कोई भी राजनैतिक दल हो किसी को कोई परवाह नहीं अगर परवाह है तो सिर्फ राजनितिक रोटिया सेकने की और इन रोटियों के चक्कर में अगर किसी का नुकसान हो रहा है तो है तो वो है आम आदमी और दोस्तों मैं किसी राजनैतिक दल का नाम नहीं ले रहा हु! मेरा मतलब है डेल्ही की दबी- कुचली जनता से।

दोस्तों शायद आप आप ने त्रिलोक पूरी की  घटना का संज्ञान लिया हो,  जिस में एक  मासूम ने अपनी जान गवा दी और ये सब हुआ सिर्फ ई - रिक्शा की टक्कर की वजह से वो बच्चा खोलते हुए तेल कड़ाही में गिर गया और अपनी जान गवा दी,  साथ ही  उस मासूम की जान बचाने के चक्कर में उसकी माँ के दोनों  हाथ भी जल गए!

उस के बाद   सरकार ने तो नहीं लेकिन हमारे उच्च न्यायालय ने इस घटना  का संज्ञान लेते हुए अगले आदेश तक इन  ई - रिक्शा के परिचालन पर रोक लगा दी है, पर मेरा सवाल जस का  तस क्यों हम सब दुर्घटनाओ का इंतज़ार करते है क्यों नहीं हम पहले से ही दुर्घटनाओ से बचने के तरीके खोज पाते, ताकि हम आम जनता की जान माल की रक्षा कर सके,  और उन नियम कानूनो को सख्ती से लागु किया जाये। या फिर ये हमारी आदत में शुमार हो गया है की पहले दुर्घटनाओ को हो जाने दो फिर जा कर हमारी सरकार की नींद खुलेगी, क्यों हम लोगो की जान गवाने तक इंतज़ार करते है.

ऐसा नहीं है की ये पहली घटना है इस से पहले भी कई बार ई - रिक्शा के परिचालन को लेकर सवाल उठे पर फिर वोही ही राजनीतिक दलों की रोटिया और फिर दुबारा से कुछ नही.

मैं कोशिस कर रहा हु इन  ई - रिक्शा के परिचालन से होने  वाली परेशानियों के बारे में से अगर आप मेरी बातो से सहमत हो तो मेरा ये बॉलग जरूर शेयर करे ताकि जायदा  से जायदा  लोगो  तक जागरूकता फैला सके और अपनी आवाज को सरकार और सम्बन्दित कार्यालयों तक पंहुचा सके.


  • अवैध ई - रिक्शा:- अभी तक सरकार के दवारा कोई  भी ऐसा कानून नहीं लाया गया है जिस से हम इन ई - रिक्शा की जिम्मेदारी तय कर सके, इन का कोई चालान या इस को चलाने के लिए कोई किसी प्रकार का कोई लाइसेंस नहीं लेना पड़ता, ज़यादातर ई - रिक्शा छोटे मोटे माफिया लोगो के है जो इन को किराये पर दे कर पैसा कमा  रहे है, 

  •  बांग्लादेशी ड्राइवर : इन  ई - रिक्शा के कारोबार में कई बांग्लादेशी नागरिको भी  पैसा कमा रहे है, उन की महिलाये डेल्ही के घरो मैं काम करती है और बांग्लादेशी पुरष अब इन  ई - रिक्शा के परिचालन में लग गए है जिस कारण डेल्ही मैं स्लम  बढ़ता ही जा रहा है !

  •  बिजली चोरी की समस्या:-  ई - रिक्शा के साथ ही एक और समस्या ने विकराल रूप ले लिया है और वो है बिजली चोरी की  और साथ ही इन बैटरियों को चार्ज करने के लिए भी वो सरकारी बिजली की चोरी कर रहे है!  इन  ई - रिक्शा को चार्ज करने के  बिजली से चार्ज करना पड़ता है !

  • ई - रिक्शा की  बनावट :- अभी मैं पड रहा था की ई - रिक्शा के बनावट में भी ढेर सारी कमिया  कारण  ये ई - रिक्शा कभी भी पलट जाते है और लोगो को  अपनी जान से हाथ गवाना पड़ता है!

  • क्षमता से अधिक सवारी :- कम समय में जयादा पैसा कमाने की चाह मैं क्षमता से अधिक सवारी बैठा लेते है जिस कारण दुर्घटनाये होने की संभावना भी बड़ जाती है!

  • ई - रिक्शा की रफ़्तार:-हमारी डेल्ही ही अपने कम रफ़्तार सड़को के लिए जाना जाता है उस के बाद ये ई - रिक्शा की कम रफ़्तार की वजह से हमारी यातायात की रफ़्तार में भी कमी आई है जिस कारण हम सड़को पर लम्बा लम्बा जाम देखते है !
  • रातो को  ई - रिक्शा लाइट न जलाना:- अपनी  ई - रिक्शा की बैटरी को बचाने के लिए ये लोग अपने  ई - रिक्शा का लाइट नहीं जलाते है जिस ने इन के आने  पता नहीं चलता और दुर्घटना हो जाती है!

मेरा ऐसा मानना है की इस  ई - रिक्शा को डेल्ही की सड़को से हटा कर दूरदराज के छेत्रो मैं चलाया जाना चाहिए क्यों की अगर डेल्ही मैं ये  ई - रिक्शा ऐसे ही चलते रहे तो डेल्ही की यातायात वयवस्था जो पहले से ही धीमी और अयस्त -व्यस्त है संभालना और भी मुस्किल हो जायेगा!






            

शनिवार, 26 जुलाई 2014

भारत मैं बलात्कार के बडते मामले "एक पड़ताल "



   आज का ये मेरा ब्लॉग समर्पित है, लखनऊ की  बलात्कार पीड़िता को, जो की अब इस दुनिया मैं नहीं रही, मैं भगवान से उसकी  आत्मा की शांति की प्राथना करता हु!



   साथ ही जहन में  एक सवाल बार बार उठता है आखिर कब तक .… ऐसे ही देश की बहन बेटियो की आबरू से खेला जाता रहेगा आखिर कब तक ऐसे ही मासूमों के साथ हैवानियत का खेल चलता रहेगा आखिर कब तक एक माँ, एक बेटी, एक पत्नी , एक बहन अपने आप को इस देश मैं सुरक्षित नहीं समझेगी, आखिर कब तक…

   मैं पूछना चाहता हु उन समाज के ढेकदारो से जो बड़ी बड़ी बाते करते है, इन सब की सुरक्षा के लिए उस के बावजूद इस तरह की घटनाये कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है! और हम सब हाथ पर हाथ रख कर बैठे  हुए है.

    मेरे को बढ़िया से याद है जब डेल्ही मैं दामिनी बलात्कार घटना हुई थी, उस के बाद देश के लोगो मैं बड़ा आक्रोश हुआ था,  बड़ी सारी कोशिस हुई इन घटनाओ को रोकने को लेकर कानून बनाने की बात हुई,  पुरे देश मैं इस घटना को लेकर जिस प्रकार का माहौल था उस के बाद हम सब को लगा की शायद  अब इस प्रकार की घटनाओ की पुनरावर्ती नहीं होगी, लेकिन मुझे बड़े खेद के साथ कहना पड़ रहा है की,  ये सब बातें अब हवाई हो गयी है  सब लोग उस घटना को भूल गए है! सब लोग अपने मैं  इतने वयस्त की किसी को किसी से  कोई  फर्क ही नहीं पड़ता! सब लोगो ने अपने समाज का एक दायरा बना लिया है और वो लोग इस दायरे से बहार नहीं निकलना चाहते !

और,  जब तक ये ":चलता है वाला हमारा रविया"  रहेगा मैं दावे के साथ कह सकता हु तब तक  हम इन घटनो को नहीं रोक पाएंगे!



मैं इस ब्लॉग के  दवारा आपका  ध्यान खीचना चाहता हु की,  भारत मैं बलात्कार की घटनाये कोई नयी  घटनाये  नहीं है ये भुतकाल से चली आ रही है पहले ये घटनाये कम थी पर वर्तमान मैं इन की संख्या बड़ गयी है, लेकिन भुतकाल और वर्तमान काल के बलात्कारों मैं जो मूलभूत बदलाव आया है वो है वो है इन घटनाओ में पीड़िता के साथ होने वाली  यौन हिंसा, जैसा की हम वर्तमान की घटनाओ में देख रहे है.

 जैसा की  मैंने अपने पहले के ब्लॉग में भी लिखा था की आखिर क्यों लोगो मैं इतनी हिंसा भर गयी है, क्यों पीडा व संवेदनाये खत्म होती जा रही है

वर्तमान में जब भी कोई बलात्कार की घटना हमारे सामने आती है तो सभी टीवी चैनेलो पर इस बारे मैं बहस शुरू हो जाती है,  की आखिर ये घटनाये क्यों हो रही है, तो कई लोग का मत  लड़कियों/औरतो के पहनावे को दोषी बताते है कुछ लोग आदमियो की मानसिकता को गलत बताते है !

हमें इस बात को समझना होगा की,  भले ही हम भारत को 21वी सदी में देखते है पर आज भी हमारे समाज में पुरुष की प्रधानता है, और ये प्रधानता आदि काल से चली आ रही है अगर हम सोचे की हम इस को कुछ समय मैं ही बदल देंगे तो शायद  यह हमारी गलत सोच होगी, ये मंजर भी बदलेगा पर समय लगेगा, हमें इस बात को समझना होगा की  हम भारतीय सिर्फ कपडे बदलते है सोच नहीं, और जब तक सोच नहीं बदलेगी तब तक इन घटनाओ को रोक पाना मुश्किल होगा और ये सोच सिर्फ पुरुष ने ही  नहीं स्त्रियों ने भी बदलनी है इस बात को हमें समझना होग.   

अब हम समझने की कोशिस करेंगे की आखिर इन घटनाओ के बढ़ने के पीछे क्या कारण हो सकते है

मीडिया :-  आज आप किसी भी टीवी चैनल को देख लीजिये, भारत में  बनने वाली फिल्मो को देख लीजिये जहा पर परिवारिक समरसता को खत्म  दिखाया जा रहा है, और औरत को सिर्फ  "भोग" की वस्तु दिखाया जा रहा है, जिस का परिणाम हम आज समाज में  देख रहे है, आधुनिकता के नाम पर जिस तरह का "नंगा" नाच मीडिया में  दिखाया जा रहा है उस के लिए कोई आवाज नहीं उठाता, मैंने खुद कुछ ऐसी फिल्मे देखी है जिस को हमारी सरकार ने (u /a ) प्रमाण पत्र  दिया है पर आप उन फिल्मो के कुछ दृश्यों को अपने माता पिता  और अपने बच्चो के साथ नहीं देख सकते.

जब कोई  इस नग्नता की खिलाफ आवाज उठता है,  तो उसे संकीड़ (छोटी सोच ) वाला बताया जाता है, उसे आधुनिकता के खिलाफ बताया जाता है, और उसे बेइज़त किया जाता है, यही कारण है की कोई इस के लिए आवाज  नहीं उठाता, जब की यही सच्चाई है.

जब भी देश  में  कही भी बलात्कार की घटना होती है उसे सामचार चैनल उसे मसाला लगा कर दिखाते है, इन चैनल वालो की किसी की भावनाओ और सवेंदनाओ से कोई मतलब नहीं, जितना हो सकेगा उस खबर को मिर्च मसाला लगा कर दिखायेंगे ताकि उन के न्यूज़ चैनल की T R P बड़े. हम को इस बात को समझना होगा की कुछ न्यूज़ बड़ी ही संवेदनशील होती है उन को उतनी ही सवेदना के साथ दिखाया जाना चाहिये , ताकि समाज में  एक स्तर कायम रह सके.

सूचना प्रद्योगकी  का गलत उपयोग:-  (Internet ) जिस प्रकार से सुचना प्रद्योकि ने हमारे जीवन के हरएक पहलु को छुआ है उस से  आज के समय में  कोई भी अछूता नहीं  रहा है, इससे  हमारे जीवन में  बड़े सकारात्मक बदलाव आये है, आज हमारा जीवन इस के आने से और भी जायदा आसान हो गया है! लेकिन जिस प्रकार इस ने हमारे जीवन को आसान बनाया है कई प्रकार से ये हमारे जीवन व समाज के लिए नासूर बनता जा रहा है मैं बात कर रहा हु जिस प्रकार से इंटनेट के द्वारा किसी भी उम्र के लोगो को जितनी आसानी से अश्लील सामग्री  उपलब्द हो   जाती है वो बड़ी ही गंभीर समस्या का रूप लेती जा रही है, मैंने कुछ दिन पहले ही सुना की इंटनेट के उप्पर अश्लील सामग्रियों का बाज़ार करीबन 20,000/- करोड़ का है इस बात से आप समझ सकते है की ये कितना बड़ा बाजार है और कितने लोगो तक इस की पहुंच होगी, आज भी भारत मैं जब भी आप अश्लील साइट को खोलते है वो आप की उम्र के बारे मैं पूछता है जहा पर आपको सिर्फ 18 + वाले मैं क्लिक करना होता है, और बस आप उस के बाद वह कुछ भी देख सकते !!! आप अपने मोबाइल मैं सर्च कीजिये  सब कुछ आप के जब मैं, व्हाट्स अप  और सोशल साइट्स में ऐसे ग्रुप है जो दिन भर सिर्फ और सिर्फ पोर्न भेजते रहते है ये जो पॉलसी है वो बिलकुल भी इस समस्या का समाधान नहीं है. और इस तरह के अश्लील साइट को देख कर देश में  बलात्कार की घटनाये निश्चित ही बड़ी है. शायद मेरी इस बात से कई लोग  इतफ़ाक न रखें हो सकता है की नज़रिया अलग हो पर ऐसा है.


सामाजिक ताने बाने का बिखराव :-  जब से समाज में  परिवार विखंडित हुए है उस का भी ये एक कारण है की महिलाओ में  असुरक्षा का  भाव बड़ा है!  साथ ही लिविंग रिलेशन वाले रिश्ते जो की बाद मैं बलात्कार का रूप ले लेते  है, आखिर  कैसे लोग प्यार से बलत्कार का स्वरूप दे देते है, क्यों हमारा समाज ऐसे लोगो को बढ़ावा देता है, जिस के कारण समाज में इस प्रकार की विसंगतियाँ पैदा होती है.  परिवार में  माँ से बेटी की प्राइवेसी हो गयी है, बेटे बाप के बीच प्राइवेसी हो गयी है, ये जो प्राइवेसी सब्द है ये ही सब से बड़ा प्राइवेसी हो गया है, हमें हमें समझना होगा की प्राइवेसी है क्या  ये पहले नहीं हुआ करती थी क्या  या सिर्फ मोबाइल आने के बाद ही सब कुछ प्राइवेट  हुआ है, क्या इस से पहले कोई प्राइवेसी नहीं थी, बिलकुल थी पर उस प्राइवेसी का कुछ मतलब था आज के प्राइवेसी का मतलब है अपनी गलतियों को छुपाना, बच्चो से ले कर सभी के हाथो में  मोबाइल और मोबाइल के अंदर मोबाइल की कीमत से जयादा के  लॉक्स,  में  पूछता हु की आखिर ऐसी कौन सी प्राइवेसी की आप को हर अप्प को लॉक करना पड़ता है!

क्यू नहीं हम अपने मोबाइल फ़ोन को अनलॉक कर  और उदहारण पेश करे . की हमें अपने लोगो से कुछ गुप्त रखने की जरूरत नहीं है.

आज जब भी हम इस तरह की घटनाओ को रोकने की बात करते है तो हम सब ये मान लेते है की यह सरकार का काम है और हम इस मैं कुछ नहीं कर सकते, ऐसा  ऐसा नहीं ही की आप इस मैं कुछ नहीं कर सकते अगर आप चाहे तो कुछ भी कर सकते है लेकिन करना कोई नहीं चाहता,  क्या आप बलात्कारियो का सामजिक बहिष्कार नहीं कर सकते, जैसा मैंने कहा सब ने अपना अपना दायरा बना लिया है अगर उस मैं कुछ होता है तो उस पर उन की प्रतिक्रिया आती है नहीं तो सब मौन। 

सरकार को चाहिए की वो इस प्रकार की घटनाओ की पुनरावर्ती को रोकने के लिए कठोर कानून बनाये, इस तरह की घटनाओ का निपटारा फ़ास्ट ट्रक कोर्ट मैं करवाये! दोषियों को जल्द से जल्द और कठोर से कठोर सजा दिलवाए और लड़कियों और ओरतो को भी ये समझना है की वो अपने बचाव मैं कुछ ऐसी चीजे रखे ताकि वो आसानी से इस तरह से शिकार न बने! साथ ही साथ  उन को भी ये समझना होगा की उन की भी कुछ मर्यादाये है वो उन को न लाँघे। तभी जा कर हम समाज से इस बुराई को खत्म कर सकेंगे.



केन्द्र सरकार  को चाहिए की वो इस तरह के मामलों की उचित कार्यवाही की निगरानी के लिए  राज्यों मैं कोर कॉमेटी बनायीं जाये जो की हर तीन महीने में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार  सौपे, और उस के बाद केन्द्र सरकार इस बात का ध्यान रखे के सभी मामले कम समय सीमा मैं निपटे। 

ये सभी विचार मेरे अपने है  है अगर आप को लगता है की इन विचारो मैं कुछ कमी या बड़ा चढ़ा कर बताया गया है तो आप मेरे साथ इन के लिए अपने प्रश्न इस ब्लॉग के माध्यम से भेज सकते है मैं यथा मेरे ज्ञान उस का उत्तर देने का प्रयास करूँगा!





  

सोमवार, 21 जुलाई 2014

भारत की राजधानी डेल्ही और डेल्ही की सरकार...

     

       

एक बार फिर से डेल्ही मैं सरकार बनाने के लिए जोड़ तोड़ और गुटबाजी का मंज़र नज़र आ रहा है!
डेल्ही से देश से  अपना सब कुछ लूटा चुकी "आप" एक बार फिर चुनाओं और सरकार बनाने की बात करती नज़र आ रही है.

      आप जिस किसी समाचार चैनल चलाइये बस आप को भारतीय जनता पार्ट्री और आप के सदस्य मुहजवानी एक दूसरे पर हमला करते हुए नज़र आ रहे है, हर कोई दल एक दूसरे को चुनाओ से डरा हुआ बता रहा है, कोई बोलता है हमारे दल के नेता को २० करोड़ का ऑफर है कोई बोलता है की हम ख़रीद फ़रोख़त मैं विश्वास  रखते.

    पर आज भी बुनियादी सवाल की आखिर आम जनता का क्या वो आज  अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रही है।  वो आज भी अपने को समझा नहीं पा रही है की आखिर उन की क्या गलती, उन्होंने भारतीय जनता पार्ट्री को आजमाया कांग्रेस को आजमाया और आखिर मैं आप को अपना बहुमूल्य वोट दिया उम्मीदों के साथ..... नतीजा वोही ढाक के चार पात.

  अब चाहे अगले चुनाओ मैं किसी की भी सरकार बने पर अगर किसी का नुकसान होने वाला है तो वो है  जनता क्योकि उन की खून पसीने की गाड़ी कमाई दुबारा से चुनाओ मैं खर्च होने वाली है, जिस पैसे का इस्तेमाल जनता के हित के लिए किया जाना था दुबारा से चुनाओ मैं खर्च होगा।  

और फिर क्या वो सरकार सही  पायेगी? जनता की उमीदो पर खरा उतर पायेगी?

सवाल बहुत सारे पर जवाब शायद एक  सब्द और वो है उम्मीद"              

शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

"Young and Experience Prime Minister" Narender Damodar Das Modi

 



       मोदी सरकार का एक महीना और एक महीने मैं बहुत सारी  चुनौतियाँ,  पर मैं धन्यवाद देना चाहता की उन को और उन की सरकार को,  की उन सभी चुनौतियों पर मोदी सरकार सही रूप से  कार्य कर रही है.

   हमें इस बात को समझना  मोदी जी द्वारा  जो कार्य किये जा रहे है उन का परिणाम आने मैं समय लगेगा! शायद आप ने एक बात जरूर पड़ी और   सुनी होगी जिस मैं कहा जाता है की अच्छी चीजो मैं हमेशा  टाइम लगता है!

जिस प्रकार से उन्होंने अपने बजट मैं टैक्स छूट को बड़ा कर आम आदमी को रहत देने का काम किया है वो  काबीले तारीफ है ! साथ ही जिस इराक संकट मैं फसे लोगो को भारत ला कर उन्होंने अपनी नीति का परिणाम दिया है!

गंगा जो की भारत की सब से पवितर नदियों मैं से एक है,  न सिर्फ गंगा बल्कि देश मैं  नदियों को साफ करने और उन के दोहन पर जिस प्रकार   मोदी जी ने अपना नज़रिया रखा है!   वो भी काबिले तारीफ है! वो जाते है की आने वाले समय मैं पानी की कीमत क्या होने वाली है  अगर अभी से हमने अपने जल को नहीं संभाला तो आने वाला समय और भी भयावय हो सकता है.

अभी हाल मैं जैसे भारत ने ब्रिक्स बैंक बनाने की योजना को अमली जामा पहनाया है ये भारत के प्रधानमंत्री की दुरशिता  का पता चलता है साथ ही  जिस प्रकार  से उन्होंने पश्चिमी देशो के सामने एक नयी चुनौती रखी है,  उन की कोशिस रही है  पश्चिमी देशो द्वारा प्रयोजित वर्ल्ड बैंक के एका अधिकार को चुनौती दे सके. और  दूसरे और तीसरे दर्जे के देशो को भी बराबरी  मौका मिल सके. साथ ही साथ इस बैंक का मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी भरतीय बनाने मैं सहमति बनायीं है ये भारत वासियो के गर्व  है.

जहा तक मैंने मोदी जी के बारे मैं सुना और  जाना है मैं जिस बात की लिए मोदी जी को सबसे जायदा पसंद करता हु वो है उन की दूर दर्शिता और और दर्शिता आती है आप है आप के अनुभव से हमें इस बात पर गर्व होना चाहिए की हमें एक जवान सोच और अनुभवी प्रधानमंत्री मिला है.


सोमवार, 20 जनवरी 2014

:Delhi Police:


150 साल पुराना इतिहास गौरव कि इतनी सारी गाथाये, डेल्ही कि शान डेल्ही पुलिस कई बार सवालो के घेरे  मैं रही है, बहूत सारे सवाल और सवालो के अधूरे उत्तर…

    आप कि सरकार आज धरने पर बैठी है,  आम जनता भी उनके साथ बेठी है पर एक बात नहीं समझ मैं आ रही के ऐसा आखिर हो क्यों रहा है, क्या केजरीवाल को आंदोलन करने मैं मजा आता है, या उनकी बातो मैं पहले जेसी सचाई है, इस मैं कोई दो राय कि डेल्ही मैं डेल्ही पुलिस का काम  करने का तरीका ठीक नहीं है, और ये वो लोग  ही बता सकता है जो इनके आप किसी काम  से गया हो ये केसे लोगो को परेशान करते है, सीधे सच्चे व्यक्ति को परेशान करते है और बदमाश लोगो को सहयोग करते है !

    एक छोटी सी बात बोलता हु आप जाओ पुलिस स्टेशन अपना मोबाइल चोरी कि रिपोर्ट लिखने के लिए तो आप को वहा पर पुलिस वाला बोलेगा कि आप ये बोलो कि आप का मोबाइल चोरी नहीं हुआ है हा गिर गया है, इस लिए हम आप कि चोरी कि रिपोर्ट नहीं लिखेंगे आप कि शिकायत कोरे कागज पर लिख कर दे दो हम कारवाही, बस उस के बाद आप भुल जाइये अपने मोबाइल को.… और अगर आप कभी गलती से पुलिस स्टेशन दुबारा से पता करने चले गए अपने मोबाइल के बारे मैं तो आप को उल्टा डाँट कर वापिस बेज दिया जायेगा !

    इस बात मैं कोई दो रे नहीं जो भी डेल्ही पुलिस ने डेल्ही के नेताओ के साथ किया वो बेहद है शर्म नाक है, मंत्री होते हुए भी उनको किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिला तो इस बात से साबित होता कि जब आम जनता का क्या हश्र होता होगा !

   और कही न नहीं केजरीवाल कि इस बात मैं दम लगता है कि डेल्ही पुलिस को डेल्ही सरकार के अंतर्गत ही होना चाहिए नहीं तो ऐसी ही समस्यों  से दो चार होते रहना पड़ेगा !



    

शनिवार, 18 जनवरी 2014

::AAM AADMI PARTY:: "AAP"

 
  "आप" जिस तरह से विनोद कुमार बिन्नी आप के साथ खेल रहे है  लग रहा है कि कही न कही ये एक साजिश के तहत हो रहा है, अभी तो सरकार बने कुछ ही दिन हुए है और इस तरह से अगर "आप" के नेताओ के मतभेद मीडिया के सामने आते रहेंगे तो ये डेल्ही और डेल्ही कि जनता के साथ धोखा होगा जिन्होंने बड़ी उम्मीदो के साथ एक भरोसा "आप" जताया है!

    कांग्रेस से कोई पार्टी कुछ सीखे या न पर मैं ये मानता हु कि पार्टी अनुसासन कैसे कायम रखा जाता है जरूर सीखना चाहिए !

 मेरा सवाल ये है कि  आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी आन पड़ी थे कि  विनोद कुमार बिन्नी को सार्वजानिक मंच पर आ कर इस तरह से "आप" और अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ बोलना पड़ा, क्या ये मुदे पार्टी भीतर नहीं सुलजाये जा सकते थे, क्या अरविन्द केजरीवाल सच मैं तानाशाह हो गए है  !

साथ मैं एक बात और बोलना कहता हु कि हमें टाइम देना होगा अरविन्द केजरीवाल को काम करने का क्योकि कही ऐसा न हो कि वो हमारी मांगो, उम्मीदो के तले इतना न दब जाये कि गलत फैसले लेने सुरु कर दे, किसी भी सरकार को हमारा संविधान 5 साल  का मोका देती है काम करने के लिए और हमारी उमीदे "आप" के साथ इतनी जयादा है कि हमें लगता है सब कुछ रातो-रात बदल जाये !


शनिवार, 4 जनवरी 2014

AAP- A New Beginning In Indian Politics


       

       एक लंबे संघर्ष के बादऔर,अरविन्द केजरीवाल के अथक प्रयासो के बाद ख़िरकार डेल्ही मैं आम आदमी कि सरकार बनी, हम सभी कि और से आम आदमी पार्टी को सुभकामनाये , और जिस तरह के वादे देल्ही के मुख्यमंत्री साहब ने किये है हम सब कि उम्मीदे है कि वो इन उमीदो पर खरा उतरेगे।
         बात अरविन्द केजरीवाल कि तो कोई लम्बा चौड़ा इतिहास नहीं है इन का राजनीति के छेत्र  मैं पर जिस तरह से उन्होंने डेल्ही वासियो को उम्मीद दी है अछे सुशासन कि अगर वो इस मैं कुछ हद तक भी सफल हुए तो उन के जीवन कि बड़ी उपलभदियो मैं गिना जायेगा !


          हमें अच्छे सुशासन के साथ एक बात ये  भी समझनी होगी कि अगर हम किसी पार्टी या किसी भी नेता से बहुत सारी उम्मीदे रखते है तो हमे इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि वो पार्टी और वो नेता भी आप से कुछ उम्मीदें रखता है, मसलन बात है भ्रष्टाचार की तो हमें भी साथ देना होगा, हमें भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी होगी, अगर कोई आप से भ्रष्टाचार (रिश्वत) मांगता है तो हमारा कर्तव्य बन जाता है कि हम उस कि रिपोर्ट करे और उसे रिश्वत न दे. 


क्योकि  भ्रष्टाचार को बढ़ाने और घटाने के लिए जितना जिमेवार सरकारे है उतनी ही जनता भी जिमेवार है, अगर हम रिश्वत देंगे ही नहीं तो लने वाला रिश्वत लेगा कैसे।
एक और बात जो मुझे अरविन्द केजरीवाल कि बहुत अच्छी लगी कि उन्होंने बोला है वो वो डेल्ही के स्वास्थ्य सेवाओ, और शिक्षा के स्तर को सुधारने कि कोसिस करेगी वो कि एक बढ़िया बात है.


ये मेरा पहला ब्लॉग है अरविन्द केजरीवाल पर और मेरी सुभकामनाये उन के साथ, और ये उम्मीद करता हु कि वो डेल्ही को सुसाशन देंगे!!!


शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

Delhi Election 2013

          एक  बार फिर से सभी बरसती मेडक अपने अपने बिलो से बाहर आ गए है,  बाहर जा कर देखा तो पता चला कि चुनाव आने वाले है, पिछले पाँच सालो से जिन नेताओ से आपने मिलने कि कोशिस  करी और आप कि हर कोशिस बेकार गयी देखो मौसम कैसा बदला कि वो आप से मिलने आ पहुचे वो भी आप के द्वार, आप कि परेशानी सुनने का  का समय अब जा कर मिला है उन को पिछले पाँच सालो मैं तो वो अपने और अपने जानने वालो कि समस्यांए सुन रहे थे!↓

     हमारे देश की  सबसे  बड़ी समस्या ये है कि लोगो को अपने वोट कि कीमत का पता ही नहीं, उन को लगता है कि बस चुनाव और कोई भी जीते क्या फ़र्क़ पड़ता है, इस लिए या तो वो चुनाओ मैं भाग नहीं लेते है या फिर अपना वोट बिना सोचे समझे दे आते है, लोगो का मानना यह है कि नेताओ ने  करना उन्होंने  वो ही है जिस मैं उस का और उस के जान पहचान वालो का भला होगा, सरकारी मकान, सरकारी दुाकन, सरकारी गाड़ी, सरकारी फ़ोन, और न जाने क्या क्या फायदे मिलेंगे उन को अगर वो ये चुनाव जीत गए!

    दोस्तों एक और बात हमारे देश कि एक और बड़ी विडम्बना है कि यहाँ पर सरकारी नौकरी पाने के लिए दुनिया जहान कि पढ़ाई करनी पड्ती है, कई टेस्ट पास करने पड़ते है फिर आखिर मैं इंटरविवे से गुजरना पड़ा है तब जा कर कही एक छोटी से सरकारी नौकरी  मिलती है, पर देखो तमाशा कि ये नेता बंनने के लिए कोई पढाई नहीं कोई लिखाई नहीं और अगर आप कि किस्मत ने साथ दिया और आप को मोका मिला नेता बनने का तो ये पढ़ाई किये लोग आप के आगे पीछे, सोचो हम एक सरकारी बाबू को रखने के लिए इतने टेस्ट रखते है और जो इन  सरकारी बाबुओ को ऑर्डर देता है वो जायदातर लोग जानते ही नहीं कि काम केसे  किया जा है! 

   नोकरी के अंदर आप के रिटायरमेंट कि उम्र होती है पर नेतागीरी कि कोई उम्र नहीं जब तक मन नेतागिरी  करे, सरकार कि सोच भी अजीब है सोचती है कि 60 के बाद आदमी किसी काम  का नहीं, उस को घर बेजो  पर उस को नेता बनाने के लिए कोई उम की समय सीमा नहीं!!!