रविवार, 21 जुलाई 2013

Mid Day Meal Scheme In India

   

        भारत सरकार के बड़े-बड़े दावे और उन दावो का दम निकालता सच, आज  बात बिहार की और बिहार मैं उन बच्चो की जो आज भी जिन्दगी और मोंत के लिए लड़ रहे है, हमें सोचना है उन हरएक बच्चे के माता पिता के बारे मैं जिन्होंने अपने बच्चो को स्कूल भेजते हुए उनके उज्जवल भविष्य के बारे मैं सोचा था, पर उनको क्या मिला, अब  ये हम सब के सामने है, और उन माँ बाप का दर्द उन के सिवा कोई नहीं समझ सकता जिन की बच्चे आज जिन्दगी और मोत के लिए लड़ रहे है।

        रह-रह कर  हर बार एक ही बात निकल कर आती है की आखिर जो कुछ हुआ उसकी   जिमेवारी किसकी और जिस की जिमेवारी है क्या उसे सजा मिलेगी_______ तो ये एक एसा प्रश्न है जिस का जवाब बता पाना मुस्किल है। सरकार अपने मीड डे मील की स्कीम पर अपनी  पीठ थपथपाती रहती है की ये वर्ल्ड की सबसे बड़ी स्कीम है जो बच्चो मैं पोषण देती है पर इस  का सच आप के सामने है की वो बच्चो को कितना पोषण दे रहे है!!!

    जो कुछ भी बिहार के छपरा के एक सरकारी स्कूल मैं हुआ उस के लिए सरकार  (प्रसाशन) जिमेवार है, सरकार का काम सिर्फ योजनाये बनाने भर का नहीं है उसे इस  बात का भी ध्यान रखना है की जो योजनाए वो बना रही है उस का  क्रियान्वयन भी सही प्रकार से हो,  रहा है या नहीं, अगर नहीं तो इस मैं क्या कमिया है और क्या और सुधार इस को ठीक करने के लिए किये जा सकते है उन सब को करना चहिये 


 ये बात नयी नहीं है की सरकारी स्कूल मैं मैं जो भोजन बच्चो को  मीड डे मील के नाम पर  जा रहा है उस की गुणवक्ता ठीक नहीं है और ये बात बार बार निकल कर आती रही है पर आज तक इस को सुधारने के लिए क्या-क्या कदम उठाये गए इस बात की जानकारी सायद ही किसी को हो।

     ये हमारी फिदरत मैं हो गया है की हम घटना होने की कुछ दिन तक तो उस घटना को लेकर हल्ला मचाते है फिर कुछ दिन बात उस घटना को भूल जाते है, जिस से इस तरह की घटनाओ को पुनरावर्ती होती रहती है, और हमें एस बात को भी समझना होगा की ये स्कीम  बहुँत बड़ी स्कीम है और एस के साथ बहुँत ज्यादा पैसा जुड़ा हुआ है इस लिए इस स्कीम पर और जायदा निगरानी रखने की जरूरत है ! और जो लोग भी इस मैं लापरवाही मैं पकडे जाये उन को सख्त स सख्त सजा मिलने चहिये ताकि वो हमारे (भविष्य) बच्चो की जिन्दगी के साथ न खेल सके… 

रविवार, 7 जुलाई 2013

Maoist Problem in "India"

             
  कुछ दिन पहले जो मध्य प्रदेश मैं माओवादियों का हमला हुआ उस से सारा देश स्तब्द है और बीच बीच मैं आपको और भी ऐसी ही ख़बरे मिलती रहती है, अब की बार हो हल्ला एस लिए जायदा हुआ की राजनीतिक दल के लोग मारे गए अगर यही आम आदमी मारा जाता तो सायद इतना हो हल्ला नहीं होता, और यही कारण है है हम इस समस्या का हल नहीं निकाल पा रहे है, हमारे  देश मैं आम आदमी और राजनितिक लोगो के जान की कीमत अलग अलग है इस लिये आम आदमी मारा जाता है तो उस को कुछ मुवाब्जा दे कर शांत कर दिया जाता है और अब की बार राजनीतिक दल के लोग मरे गए, अब की बार इतना हल्ला हुआ!

                  इस देश मैं बड़े बड़े बुद्धिजीवी लोग रहेते है, पर कोई भी इस  समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है, माओवादियों को आतंकवादियों जेसा समझा जा रहा है, उनको ख़तम करने के लिए पुलिस और फोज का सहारा लिया जा रहा है, और मेरा मानना यह है की  यही से हम दिशा भटक गए है इस  से कभी भी इस समस्या का हल नहीं निकल सकता!!!

                      अब बात की आखिर ये लोग हथियार क्यों उठा लेते है क्यों ये लोग  माओवादि बन जाते है इस के लिए एक छोटी सी बात को समझना होगा की आप आजकल एक खबर आम तरीके से पढ़ते  होंगे की देश के किसी कोने मैं जंगली जानवरों ने इंसानी बस्तियों पैर हमला कर दिया, सब ने बोल की जंगली जानवर आये, पर ये नहीं सोचा की वो क्यों आये वो एस लिए आये क्यों की ये जमीन उन की है जिस पर आदमी अपना हक जाता रहा है, जानवर के पास एस की सिवा और कोई चारा नहीं है, वेसे तो आदमी अपने आप को बड़ा  बुद्धिजीवी समझता है, क्या उस ने उन जगली जानवरों का घर उजाड़ने से पहले उन के लिए कोई दूसरा  प्रबन्द किया, तो आपको जवाब मिलेगा नहीं तो इसी लिए जंगली जानवरों ने आप की बस्तियों पर हमला किया ये बात समझने की है ये तो  बात थी जानवरों की यही बात लागु होती है इंसानों पर जब हम उन को उनकी ही जमीनों से बेदखल करेंगे और वो भी बिना उनको दूसरी जगह वय्स्थपित किये तो यही कारण है की जब जानवर इंसानी बस्तियों पर  हमला कर सकता है तो इंसान जानवरों से तो जायदा समझदार है तो बात को समझना होगा की जब तक हम समस्या की मूल जड़ मैं नहीं जायेंगे तब तक ये जोयो की त्यों बनी रहेगी, सब से पहले हमे उन लोगो का दर्द समझना होगा की आखिर इसे कोन से हालत है की ये लोग हथियार उठाने मैं भी नहीं हिचकचाते_____